Ambedkar's novel 'Navayan': Pedestal and Ideology (With reference to addressed speeches and published magazines)
अंबेडकर प्रणीत् ‘नवयान’: पीठिका और वैचारिकी (उद्बोधित भाषणों एवं प्रकाशित पत्रिकाओं के संदर्भ में)
DOI:
https://doi.org/10.31305/rrijm.2022.v07.i11.001Keywords:
Superhero, humanism, Uuntouchable, Conversion, Egalitarian Society, individual centre, truthfulness, self-promotion, highest position of conscienceAbstract
Dr. Bhimrao Ambedkar has been a recognized Great Hero of the past century. He is neither a Shudra by birth nor a Brahmin by birth. He is a Brahmin and a Shudra on the basis of Karma. The philosophy and way of life in the form of liberty, equality and fraternity can be found only in Buddhism. Teachings and characteristics of Buddha and Dhamma: Individual centre, truth-exploration, self-promotion, humanism, the spiritual state of religion, and the highest state of conscience Ambedkar Praneet Navayana was the cornerstone of Humanity.
Abstract in Hindi Language:
विगत शताब्दी के मान्य महानायक रहे हैं डॉ भीमराव अम्बेडकर। डॉ अम्बेडकर का चिंतन-व्यवहार का आधार बिंदु मानवता ही है जो नस्ल, रंग, जाति, लिंग भेद से परे है जिसमें समता समाज ही उनके नवयान का आधार बनी। यह धारणः प्रत्येक व्यक्ति न जन्म से शूद्र होता है और न ही जन्म से ब्राह्मण। वह कर्म के आधार पर ही ब्राह्मण और शूद्र होता है। डॉ भीमराव का धर्मांतरण अन्धानुकरण नहीं था। उन्होंने बौद्ध धर्म की प्रज्ञा, करुणा, और समता आधारित दृष्टि को देखा और पाया कि स्वतंत्रता, समानता और बन्धुत्त्व रूपी जीवन दर्शन और जीवन पद्धति बौद्ध धर्म में ही पाई जा सकती है। बुद्ध और धम्म की शिक्षाएँ और विशेषताएँः व्यक्ति केंद्र, सत्यान्वेषण, आत्मोन्नति, मानवतावाद, धर्म की साधनावत स्थिति, विवेक की सर्वोच्च स्थिति ही अम्बेडकर प्रणीत नवयान की आधारशिला रही।
Keywords: महानायक, मानवतावाद, अछूत, धर्मांतरण, समतामूलक समाज, व्यक्ति केंद्र, सत्यावेषण, आत्मोन्नति, विवेक की सर्वोच्च स्थिति
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